मंगलवार, 12 मई 2009

कुरूक्षेत्र के प्रमुख तीर्थ

धर्मक्षेत्र कुरूक्षेत्र की 48 कोश की पावन धरा पर स्थित तीर्थों का वर्णन आप पिछले 3-4 लेखों से पढ रहे हैं । इसी श्रेणी में हम यह लेख प्रस्तुत कर रहे हैं जिसमें आप कुरूक्षेत्र नगर में स्थित प्रमुख तीर्थों के बारे में पढेंगे तथा शीर्षक रहेगा '' कुरूक्षेत्र के प्रमुख तीर्थ '' । लीजिए प्रस्तुत है -
ब्रह्म सरोवर (कुरूक्षेत्र):-
कुरूक्षेत्र के जिन स्थानों की प्रसिद्धि संपूर्ण विश्व में फैली हई है उनमें ब्रह्मसरावर सबसे प्रमुख है। इस तीर्थ के विषय में विभिन्न प्रकार की किंवदंतियां प्रसिद्ध हैं। अगर उनकी बात हम न भी करें तो भी इस तीर्थ के विषय में महाभारत तथा वामन पुराण में भी उल्लेख मिलता है। जिसमें इस तीर्थ को परमपिता ब्रह्म जी से जोड़ा गया है । सूर्यग्रहण के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर लाखों लोग ब्रह्मसरोवर में स्नान करते हैं। कई एकड़ में फैला हुआ यह तीर्थ वर्तमान में बहुत सुदंर एवं सुसज्जित बना दिया गया है। कुरूक्षेत्र विकास बोर्ड के द्वारा बहुत दर्शनीय रूप प्रदान किया गया है तथा रात्रि में प्रकाश की भी व्यवस्था की गयी है।
स्थानेश्वर महादेव मंदिर (कुरूक्षेत्र):-
स्थानेश्वर महादेव मंदिर का नाम कुरूक्षेत्र के मन्दिरों में आदर के साथ लिया जाता है इसके आधार पर ही यहां का नाम थानेसर पड़ा है। यहां पर शिवरात्रि के अवसर पर मेला आयोजित होता है।भगवान शिव यह भव्य मंदिर रात को विद्युत प्रकाश में जगमगाता रहता है। शिवरात्रि के अवसर पर इसकी छटा देखते ही बनती है।
सन्निहित सरोवर (कुरूक्षेत्र) -
कुरूक्षेत्र में स्थित प्रसिद्ध तीर्थ-स्थानों में सन्निहित सरोवर भी बहुत महत्व रखता है।कुरूक्षेत्र में कैथल मार्ग पर श्री कृष्ण संग्रहालय के पास स्थित है तथा मुख्य मार्ग पर इसका विशाल द्वार बना है। कहा जाता है कि यहां पर युद्ध के बाद पांडवों ने सभी दिवंगतों की मुक्ति के लिए पिंड-दान आदि कार्य किया था। यहां एक विशाल सरोवर का निर्माण किया गया है; जिसके चारों ओर रात्रि के लिए प्रकाश व्यवस्था भी की गई है।
यहां सभी देवी-देवताओं के मंदिर स्थित हैं। जिनमें इसके पास ही में स्थित प्राचीन लक्ष्मी-नारायण मंदिर प्रमुख है।अन्य सभी मंदिर सरोवरके आस-पास बने हुए हैं और तीर्थ की शोभा बढ़ाते हैं।
बाण गंगा (कुरू़क्षेत्र):-
कुरूक्षेत्र से पेहवा मार्ग पर ज्योतिसर से कुछ पहले ही मुख्य मार्ग से जुड़ा हुआ एक मार्ग हमें दयालपुरा गांव ले जाता है जहां स्थित है- बाण-गंगा। इसके बारे में अनुमान लगाया जाता है कि यहां शर-शैय्या पर लेटे भीष्म पितामह को प्यास लगने पर अर्जून ने अपने बाण द्वारा धरती से जल निकाल कर पिलाया था। वर्तमान समय अर्जुन के बाण लगने वाले स्थान पर एक कुएं का निर्माण किया गया है तथा हनुमान जी की विशाल प्रतिभा के साथ-साथ यहां शर-शैय्या पर लेटे हुए भीष्म पितामह की मूर्ति है।
भद्रकाली शक्तिपीठ (कुरूक्षेत्र):-
कुरूक्षेत्र में स्थित श्री देवीकूप (भद्रकाली) मंदिर मां सती के बावन शक्तिपीठों में शोभायमान है।
शास्त्रानुसार दक्ष-यज्ञ में अपने पति भगवान शंकर की निन्दा व अपमान देख-सुनकर भगवती सती ने अपने प्राणों को त्याग दिया। भगवान शिव उनके शव को हृदय से लगाए उन्मत की भांति ब्रह्माण्ड का चक्कर लगाने लगे। तब भगवान विष्णु ने अपने सुदर्शन चक्र से महाशक्ति के निवास स्थान मृत शरीर को बावन भागों में विभाजित कर लोग कल्याण के लिए पावन शक्तिपीठों के रूप में प्रतिष्ठित किया। नैना देवी, कामाख्या देवी, ज्वाला जी इत्यादि सभी बावन शक्तिपीठ मां के प्रिय निवास स्थल हैं।
हरियाणा में एक मात्र शक्तिपीठ श्री देवीकूप भद्रकाली मंदिर है। जिसका बहुत महत्व है। इस मन्दिर में रखा सती जी का दायां टकना बार-बार इतिहास का दोहराता है। इस शक्ति पीठ में महाभारत के युद्ध से पूर्व पांडवों ने विजय के लिए मां भद्रकाली का पूजन किया था। श्री कृष्ण और बलराम का मुण्डन संस्कार भी इसी मन्दिर में हुआ। इस मन्दिर में आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना मां भद्रकाली पूरी करती है।जिससे मनोकामना पूर्ण होने के बाद भेंट स्वरूप यथा शक्ति सोने-चांदी के अथवा मिट्टी के घोडे़ चढ़ाने की ऐतिहासिक परम्परा है। नवरात्रों के अतिरिक्त शनिवार के दिन यहां विशेष रूप से पूजन होता है।
गीताजन्म स्थली (ज्योतिसर) कुरूक्षेत्र :-
संपूर्ण विश्व में भारत श्रीमद्भगवद्गीता के ज्ञान के लिए प्रसिद्ध है। गीता का ज्ञान आध्यात्मिक क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ माना जाता है।  इस विषय में कोई भी जानकारी सुनने, पढने वाले के लिए कौतूहल का विषय होगी। यह गीता ज्ञान भगवान श्री कृष्ण के द्वारा अर्जुन को उस समय दिया जब वह मोहवश कौरवों से युद्ध करने से मना कर देता है। जैसा कि हम सब जानते हैं कि कौरव-पाण्डव युद्ध कुरूक्षेत्र की भूमि पर हुआ था। उसी के पास 4 कि0 मी0 दूरी पर स्थित ज्योतिसर नामक स्थान पर अर्जुन को गीता का उपदेश दिया गया।
यहां आज भी एक वृक्ष है जिसे गीता-ज्ञान का साक्षी माना जाता है। इसके पास ही एक ऐसा शिवलिंग है जिस पर कई प्रकार के प्रहारों के चिह्न भी हैं।
जिससे अनुमान लगाया जाता है कि यह भारत पर हुए विदेशी आक्रमणों के दौरान शत्रुओं के द्वारा किया गया कार्य है।इसके अतिरिक्त महाभारत से संबंधित अनेक चित्रों की झांकी भी यहां प्रदर्शित है। ज्योतिसर को सुदंरता और पर्यटन में अहम् स्थान प्रदान करने के लिए एक कृत्रिम झील का निर्माण भी यहां कुरूक्षेत्र विकास बोर्ड द्वारा किया गया है।

5 Comments:

Ashish Khandelwal said...

kafi achchhi aur vyavasthit jankari dee hai aapne.. aabhaar

Pt.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

हरियाणा के तीर्थस्थलों के बारे में बहुत ही विस्तारपूर्वक जानकारी प्रदान कर रहे हैं आप.....अगर हो सके तो कभी कलायत गांव(जिला कैथल) में स्थित ऋषि कपिलमुनी की तपोस्थली के बारे में भी अवश्य बताएं.

(word verification हटा दें तो टिप्पणी करने में सुविधा रहती है)

दिनेश शर्मा said...

शर्मा जी ,
आपके अनुरोध पर 'कपिल मुनि'तीर्थ पर आलेख ब्लाग पर डाल दिया है ।

chandan kumar said...

दिनेश जी,

नमष्कार, we are making a travel show for TV on Kurukshetra and I need your help on it.

Regards.

chandankumar91@gmail.com | produce

hari narayan giri said...

Nice

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