Thursday, February 4, 2010

सच्ची संपत्ति

हम इस ब्लाग पर साहित्य और संस्कृति को साथ-साथ लेकर चलते रहे हैं। कभी कविता तो कभी कहानी और कभी विरासत की बात। आज आपसे एक विशेष प्रसंग बांटने जा रहा हूं ,आप इसे विरासत की बात समझें या फिर प्रेरक-प्रसंग ,ये आप के ऊपर छोड रहा हूं। लीजिए प्रस्तुत है-
काफी समय पहले की बात है किसी गांव में स्थित एक आश्रम में एक महात्मा रहते थे। जो काफी वृद्ध हो चुके थे और अब सोच रहे थे कि अपनी जिम्मेदारी किसी और को सौंप दूं। आश्रम के नाम बहुत जमीन-जायदाद थी। एक बार महात्मा जी ने सोचा,'' क्यों न आश्रम की जमीन को गरीबों में बांट दिया जाए ।'' इसके लिए एक दिन उन्होंने आस-पास के गांवों के सभी लोगों को एकत्रित करने की योजना बनायी और बुलावा भेज दिया।
महात्मा जी की इच्छा जानकर बुलावा पाते ही आस-पास के हजारों लोग नियत समय पर आश्रम के बाहर इक्कठे हो गए। जब महात्मा जी ने बाहर आकर देखा और इक्कठे हुए लोगों पर नजर दौडाई तो देखकर हैरान रह गए। क्योंकि वहां आए गरीब लोगों में गांवों के बडे-बडे जमींदार भी शामिल थे जो जमीन पाने की लालसा से आए थे । तब महात्मा जी ने कहा,''सबसे पहले वह व्यक्ति सामने आए जिसके पास सबसे ज्यादा जमीन है।'' उसके आगे आने पर वे बोले,''बोलो कितनी जमीन चहिए ?'' इस पर उस जमींदार ने कहा कि महाराज जितनी मर्जी दे दो । महात्मा जी उसकी बात सुनकर कुछ देर के लिए चुप हो गए और फिर कुछ सोच कर बोले,''आप सांय ५ बजे तक जहां तक दौड कर वापस आ जायेंगे उतनी जमीन आपकी ।'' महात्मा जी की यह बात सुनकर वह जमींदार बहुत खुश हुआ और उसने दौड़ना शुरु कर दिया। वह इतना दौडा कि दौड़ते-दौड़ते हांफने लगा पर अधिक जमीन पाने की लालसा में बहुत दूर चला गया और बहुत दूर पंहुच जाने के बाद उसके दिमाग में वापसी का विचार आया । मगर मन में अभी भी यही इच्छा थी कि दस कदम और......। लेकिन समय पर न पहुंच पाने की चिंता ने उसे वापस मोड़ दिया। पर अब समय बचा ही कहां था जो वह नियत समय पर वापस आश्रम पहुंच पाता। दौड़ते-दौड़ते उसकी सांसें फूलने लगी, कदम लड़खड़ाने लगे और अब उसका शरीर उसका साथ छोड़ रहा था। हांफते-हांफते जैसे ही वह आश्रम के द्वार के पास पहुंचा तो नियत समय लगभग समाप्त हो चला था सो उसने लेट कर आश्रम की देहली को छूना चाहा लेकिन शरीर अब निष्क्रिय हो चुका था, जैसे ही आगे बढ़ने के लिए उसने लेटना चाहा तो वह गिर गया और गिरते ही दम टूट गया।
महात्मा जी की नज़र उस पर पड़ी और उसे एक नज़र देखकर आए हुए जनसमूह से कहने लगे,'' ..और किसको ,कितनी जमीन चाहिए.. आगे आ जाओ।'' उनकी यह बात सुनकर सब लोग पीछे हट गए। तब महात्मा बोले,''यही दो गज़ जमीन जिसमें यह लेटा हुआ है इसकी असली और सच्ची सम्पत्ति है।'' अब किसी आगंतुक के मन में जमीन लेने की इच्छा नहीं रह गयी थी तथा सभी अपने-अपने घर लौट गए ।


Tuesday, January 26, 2010

गणतंत्र सौगात

भारतमाता की संतान , भारत-भू की गोद में पोषित , इसकी
रज में खेल सम्पूर्णता प्राप्त करने वाले ,विश्वमें विभिन्न स्थानों
पर विद्यमान सभी भारतीयों को गणतंत्र की हार्दिक शुभ-कामनाएं |
इस अवसर पर एक साधारण भारतीय के उद्गार
बढ़ रहे हैं बेतहाशा
दाल चीनी के भाव
हो रहे कला-बाजारी
निश दिन माला माल
बेबस अब किसान है
मजबूर है सांझीदार
खून के आंसू रो रहा
मजदूर का परिवार
खैर ,चाहे जो होता रहे
नहीं अपने बस की बात
हालत मांगते अब तो
एक संघर्ष शुरुआत
या स्वीकार करें सादर इसे
मन गणतंत्र सौगात ||



Saturday, January 9, 2010

कुरुक्षेत्र में सूर्यग्रहण उत्सव

धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र संसार में प्रसिद्ध है | इसके जिन स्थानों की प्रसिद्धि संपूर्ण विश्व में फैली हुई है उनमें ब्रह्मसरोवर सबसे प्रमुख है। इस तीर्थ के विषय में विभिन्न प्रकार की किंवदंतियां प्रसिद्ध हैं। अगर उनकी बात हम भी करें तो भी इस तीर्थ के विषय में महाभारत तथा वामन पुराण में भी ल्लेख मिलता है। जिसमें इस तीर्थ को परमपिता ब्रह्म जी से जोड़ा गया है सूर्यग्रहण के अवसर पर यहां विशाल मेले का आयोजन किया जाता है। इस अवसर पर लाखों लोग ब्रह्मसरोवर में स्नान करते हैं। कई एकड़ में फैला हुआ यह तीर्थ वर्तमान में बहुत सुदंर एवं सुसज्जित बना दिया गया है। कुरूक्षेत्र विकास बोर्ड के द्वारा ब्रह्मसरोवर के मध्य में स्थित एक शिव मंदिर और परिष्ठभूमि में ब्रह्मसरोवर
बहुत दर्शनीय रूप प्रदान किया गया है तथा रात्रि में प्रकाश की भी व्यवस्था की गयी है | आगामी १५ नवरी २०१० को यहीं सूर्यग्रहण के अवसर पर मेले का आयोजन होने जा रहा है कुरुक्षेत्र पहुंचना किसी दृष्टि से कठिन नहीं हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या १ (शेरशाह सूरी मार्ग) पर स्थित पिपली से मात्र ३-४ कि०मी० की दूरी पर कुरुक्षेत्र स्थित है। यहां चडीगढ और दिल्ली से रेल द्वारा भी पंहुचा जा सकता है। कुरुक्षेत्र से आप आसपास के महत्त्वपूर्ण तीर्थों सरस्वती तीर्थ एवं फल्गु तीर्थ पर भी पहुंच सकते हैं। कुरुक्षेत्र की विस्तृत जानकारी के लिए आप ब्लाग पर पूर्व प्रकाशित लेख पढ सकते हैं। सूर्यग्रहण के इस उत्सव में आपका स्वागत करने को यह धर्म-नगरी उत्सुकता से आपका इंतजार कर रही है।

Saturday, October 17, 2009

शुभ दीपावली


दीपोत्सवं
भवतु मंगलमयम्


हम कामना करते हैं -
प्रकाशपर्व दीवाली समस्त विश्व को शान्ति , सौहार्द्र , प्रेम और भाई-चारे से आलोकित
करे एवं सर्वत्र सुख तथा समृद्धि लाये |

Monday, September 28, 2009

कुरुक्षेत्र से आपके के लिए

आपके लिए कुरुक्षेत्र से कुछ छाया-चित्र बिरला मन्दिर

जयराम विद्यापीठ के प्रांगन में स्थित पितामह भीष्म की प्रतिमा

जयराम विद्यापीठ के प्रांगन में दंत-दान करते कर्ण

जयराम विद्यापीठ के प्रांगन में स्थित मन्दिर

हिन्दी ब्लॉग टिप्सः तीन कॉलम वाली टेम्पलेट