शुक्रवार, 2 जनवरी 2009

आ लौट चलें

मुअन जोदडो से प्राप्त
सिंधु घाटी के अवशेष
मिट्टी की गाडी
कांसे के बर्तन
आभूषण और औजार
जैसी हजारों वस्तुएं
पर
कोई हथियार न मिलना
सिद्ध करता है
शासन की स्वच्छता
तानाशाही का अभाव
सभ्य ,अनुशासित जीवन
एक समृद्ध संस्कृति को
जो आमन्त्रित करती है हमें
छोडकर ऎसी आधुनिकता को
जहाँ है खून-खराबा
हर ओर शोर-शराबा
सब ओर
हर मोड पर
यमराज नजर आता
आदमियों के अथाह समन्दर में
नहीं इन्सान नजर आता
चल लौट चलें
उस और चलें
आ लौट चलें ।

3 Comments:

roopchand said...

Aa ab loot chale is the way of our old age . It may prove a best life style for today

Sandeep said...

Very good Sir
It`s our culture.
We need the society like HARRAPA.
I like your stuff Sir

Sandeep said...

Bhoj is refliction of our social evil. We should stand angest these evils.your thoughts are apperceitable.

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