कैथल से कुरूक्षेत्र मार्ग पर कैथल से उतर दिशा में 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है गांव पबनावा। इसे पवन हृदय के नाम से जाना जाता था। पवन हृदय का अर्थ है पवन देवता का हृदय । यहां एक सरोवर है। जिसके पश्चिम किनारे पर पवन देव का मन्दिर है। पवन देव का वाहन हिरण भी उनके चित्र में दिखाया गया है।
इसके इलावा यहां भगवान श्री कृष्ण का मन्दिर भी है। जो शैली की दृष्टि से मथुरा वृन्दावन के मन्दिरों जैसे हैं। इस विषय में वामन पुराण में लिखा गया है कि पवन देव अपने पुत्र श्री हनुमान के शोक में इस सरोवर में लीन हो गए थे। ऐसा माना जाता है कि इस तीर्थ में स्नान करने से और उसके बाद महेश्वर का दर्शन करके मनुष्य पाप विमुक्त हो जाता है। महाभारत के वन पर्व में कहा गया हैः-
पवनस्य हृदे स्नात्वा मरूतां तीर्थमुत्तमम्।
तत्र स्नात्वा नरव्याघ्र विष्णुलोके महीयते।।
वायु का प्रवाह आरम्भ हुआ। अतः इसी कारण से इसे पवन हृदय के नाम से माना जाता है।