मात्र जन्म दाता नहीं
वरन ईश्वर का
एक अहसास है
पिता
सुखद जीवन के लिए
जीवन पर्यन्त
मखमली आभास है
पिता
कुदरत द्वारा प्रदत्त
सुरक्षा और प्रगति का
एक विश्वास है
पिता
पितृ देवो भव
सच है चूंकि
जीवन के लिए
एक वरदान है
पिता ।।
रविवार, 2 जुलाई 2017
पितृ देवो भव
प्रस्तुतकर्ता दिनेश शर्मा पर 8:08 pm 2 टिप्पणियाँ
लेबल: अमन सन्देश, अहसास, ईश्वर, पिता, पितृ देवो भव, वरदान
शुक्रवार, 25 मार्च 2016
मात मेरी शर्मिंदा हूँ
तेरे आँचल पर लगें दाग
कैसे और क्यूं जिंदा हूँ
शर्मनाक हालात देश में
मात मेरी शर्मिंदा हूँ।।
राष्ट्रभक्ति की परिभाषा
लिखी जाती स्वार्थ से
सबके अपने-अपने स्वार्थ
सरोकार कहाँ है भारत से
लगता है हरपल अब तो
कर सकता बस चिंता हूँ
शर्मनाक हालात देश में
मात मेरी शर्मिंदा हूँ।।
देश के ठेकेदार बने
कुछ कुर्सी के लोलुपों ने
अभिव्यक्ति के नाम पर
लगवाए नारे दिल्ली में
सीना तानकर देशभक्ति की
वे करते बात दिखा दूँ
शर्मनाक हालात देश में
मात मेरी शर्मिंदा हूँ।।
फूट डालो और राज करो
नीति ये फिर अपनाते हैं
महिलाओं के अंगवस्त्र
सड़कों पर पाए जाते हैं
दर्द मेरे सीने में भी है
कैसे विश्वास दिला दूँ
शर्मनाक हालात देश में
मात मेरी शर्मिंदा हूँ।।
जवान शहीद हों सीमा पर
जहाँ भारत माँ की खातिर
हो रहे आरक्षण आंदोलन
वहाँ राष्ट्रद्रोह जग-जाहिर
सीमा पर जो हुआ शहीद
कैसे उसकी माँ को समझा दूँ
शर्मनाक हालात देश में
मात मेरी शर्मिंदा हूँ।।
सारा भारत झुलसा आज
आरक्षण की आग में
सबको अब आरक्षण चाहिए
जाए भारत माँ भाड़ में
मुझे पता है माँ तू रोती
पर, कैसे धीर बंधा दूँ
शर्मनाक हालात देश में
मात मेरी शर्मिंदा हूँ।।
आरक्षण की आंधी का
सब ने लाभ उठाया
कईं दुकानें लूट ले गए
बस्ती का किया सफाया
किसने फूंकी बस और गाड़ी
ढूंढ कहाँ से ला दूँ
शर्मनाक हालात देश में
मात मेरी शर्मिंदा हूँ।।
वीर असंख्य हुए शहीद
तिरंगे की शान में
भूल गए हैं बलिदानों को
हम अपने अभिमान में
जाने कल कैसा हो भारत
आज की करता निंदा हूँ
शर्मनाक हालात देश में
मात मेरी शर्मिंदा हूँ।।
धर्म उपनिषद् और पुराण
रामायण,महाभारत
भूल गए हैं हम सब
सारी परंपराएं उज्ज्वल
राम मोहम्मद यीशु बुद्ध
किसकी याद दिला दूँ
शर्मनाक हालात देश में
मात मेरी शर्मिंदा हूँ।।
--0-0-0--
प्रस्तुतकर्ता दिनेश शर्मा पर 10:51 am 2 टिप्पणियाँ
लेबल: आँचल, भारत, भारत माँ, मात, मात मेरी शर्मिंदा हूँ, राष्ट्रभक्ति, Bharat, Dinesh Sharma, Maa
शनिवार, 14 नवंबर 2015
श्रद्धांजलि
प्रतिशोध के नाम पर
सैंकड़ो लोगों का बलिदान
फिर एक बार हुआ
कत्लेआम
शर्मसार हुई है फिर
आदमी की जात
नहीं इंसानियत की कोई
अब रही अहमियत
वर्चस्व की आग में
किस ओर बढ़ रहा है
बेचैन आदमी
क्यों इस कदर
जल रहा है आदमी
क्यों इस कदर
जला रहा है आदमी
क्यों इस .......
* पेरिस के कत्लेआम में मारे गए लोगों के प्रति विनम्र श्रद्धांजलि ....
प्रस्तुतकर्ता दिनेश शर्मा पर 10:03 am 1 टिप्पणियाँ
लेबल: आदमी, इंसानियत, पेरिस, श्रद्धांजलि
रविवार, 13 जनवरी 2013
शुभकामनाएं
जीवन का
हर दिन
एक त्योहार है
चलते हुए
बिना रुके
निडरता से
हर साथी के
सुख दुःख में
शामिल रहकर
मुस्कुराते हुए
उत्साह के साथ
जीवन पथ पर
बढ़ते रहना है
मंजिल मिल ही जायेगी
खुशियां खुद पास आयेंगी
और जिंदगी ऎसी
एक मिसाल कहलायेगी ।
प्रस्तुतकर्ता दिनेश शर्मा पर 8:18 am 1 टिप्पणियाँ
लेबल: खुशियां, जीवन, त्योहार, मकर संक्राति, लोहडी