पिछले कुछ समय से तीर्थों के बारे में आपको जानकारी दे रहा हूं जिसे भविष्य में जारी रखने का मेरा प्रयास रहेगा | इस सन्दर्भ में अपने अनमोल सुझाव दीजिये तथा मुझ अल्पबुद्धि का मार्गदर्शन करें | आपके सेवार्थ एक और ब्लाग बनाया है : www.preranasandesh.blogspot.com
गुरुवार, 18 जून 2009
पिछले कुछ समय से तीर्थों के बारे में आपको जानकारी दे रहा हूं जिसे भविष्य में जारी रखने का मेरा प्रयास रहेगा | इस सन्दर्भ में अपने अनमोल सुझाव दीजिये तथा मुझ अल्पबुद्धि का मार्गदर्शन करें | आपके सेवार्थ एक और ब्लाग बनाया है : www.preranasandesh.blogspot.com
प्रस्तुतकर्ता दिनेश शर्मा पर 8:27 pm 0 टिप्पणियाँ
बिन्दुसर एवं बंटेश्वर तीर्थ
हरियाणा कैथल से उत्तर-पूर्व में 16 किलोमीटर की दूरी पर बरोट-बन्दराणा दो गांव स्थित है जिनकी परस्पर दूरी एक से डेढ किलोमीटर है। बिन्दूसर तीर्थ दोनों गांव को एक करता है। इस स्थान पर कर्दम ऋषि ने अपनी पत्नी के साथ पुत्र की इच्छा के लिए तपस्या की थी। जिसे भगवान विष्णु की आंखों से जल बिन्दू गिरे थे। उसी स्थान पर यह सरोवर स्थित है। यहां पर विन्धेश्वरी देवी का पूज्य स्थान भी है। बरोट गांव में बटकेश्वर तीर्थ भी है।जिसे बटूकेश्वर महादेव से जोड़ा जाता है। हालांकि कुछ लोग बरोट का सम्बन्ध महर्षि वशिष्ठ से भी जोड़ते हैं।
प्रस्तुतकर्ता दिनेश शर्मा पर 8:25 pm 0 टिप्पणियाँ
बुधवार, 17 जून 2009
कामेश्वर महादेव
प्रस्तुतकर्ता दिनेश शर्मा पर 7:10 am 1 टिप्पणियाँ
हव्य तीर्थ
प्रस्तुतकर्ता दिनेश शर्मा पर 7:05 am 0 टिप्पणियाँ
शुक्रवार, 5 जून 2009
रस मंगल तीर्थ (सौंगल)
ततो वामनकं गच्छेत् त्रिषु लोकेषु विश्रुतम्।
तत्र विष्णुपदे स्नात्वा अर्चयित्वा व वामनम्।
सर्वपापविशुद्धात्मा विष्णलोकमवानुयात।
(महाभारत वनपर्व 83/103/104)
अर्थात् ‘‘तदन्तर तीनों लोकों में प्रसिद्ध वामन नामक तीर्थ में जाना चाहिए। वहां विष्णुपद में स्नान करके भगवान वामन की आराधना करने वाला मनुष्य सभी पापों से मुक्त हो जाता है और मुक्त होने पर बैकुण्ठ धाम को चला जाता है।’’
प्रस्तुतकर्ता दिनेश शर्मा पर 7:21 am 0 टिप्पणियाँ